1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

उदारता और कृतज्ञता आदि गुणों से भरपूर राजपूत वंशों में उत्पन्न हुए थे। अंगे्रजों ने उनके राजा पर जो अत्याचार किए थे उसके कारण उनमें बहुत गुस्सा उत्पन्न हो गया था। अवध अधिग्रहण करने के बाद अंगे्रजों ने अपने अधीन कार्य करने के लिए जब उनसे कहा तब उन स्वतंत्रता-पे्रमी लोगों में से सैंकड़ांे उग्र पुरूषों ने अंगे्रजांे को कहा,‘‘हमने स्वराज्य का अन्न खाया है, अतः गुलामी के अन्न को छूना भी हराम है।’’

अवध


961 of 2102

उदारता और कृतज्ञता आदि गुणों से भरपूर राजपूत वंशों में उत्पन्न हुए थे। अंगे्रजों ने उनके राजा पर जो अत्याचार किए थे उसके कारण उनमें बहुत गुस्सा उत्पन्न हो गया था। अवध अधिग्रहण करने के बाद अंगे्रजों ने अपने अधीन कार्य करने के लिए जब उनसे कहा तब उन स्वतंत्रता-पे्रमी लोगों में से सैंकड़ांे उग्र पुरूषों ने अंगे्रजांे को कहा,‘‘हमने स्वराज्य का अन्न खाया है, अतः गुलामी के अन्न को छूना भी हराम है।’’

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