1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

सम्मानपूर्ण और अभिनंदनीय होता है, यह पहचान हो गई थी। लगान बढ़ जाने से किसान नाराज हो गए। अंगे्रजी लश्कर के हिंदुस्थानी सिपाही, जो अधिकांश अवध के ही थे, उनके मन में भी मातृभूमि की इस दुर्दशा और दासता से व्यापक असंतोष बढ़ने लगा। युवा वाजिद अली शाह से अंगे्रजों ने कैसा घोर विश्वासघात किया था, इसे स्मरण करते हुए हर कोई अपनी तलवार पर हाथ धरे अपने होंठ चबाने लगा था।


1857 का स्वातंत्र्य समर - 204

अवध के बड़े-बड़े जमींदार शूरता,


960 of 2102

सम्मानपूर्ण और अभिनंदनीय होता है, यह पहचान हो गई थी। लगान बढ़ जाने से किसान नाराज हो गए। अंगे्रजी लश्कर के हिंदुस्थानी सिपाही, जो अधिकांश अवध के ही थे, उनके मन में भी मातृभूमि की इस दुर्दशा और दासता से व्यापक असंतोष बढ़ने लगा। युवा वाजिद अली शाह से अंगे्रजों ने कैसा घोर विश्वासघात किया था, इसे स्मरण करते हुए हर कोई अपनी तलवार पर हाथ धरे अपने होंठ चबाने लगा था।


1857 का स्वातंत्र्य समर - 204

अवध के बड़े-बड़े जमींदार शूरता,


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