बुरे शासन जैसी ही घृणा हो गई थी। स्वराज्य स्थापित कर उसपर वाजिद अली शाह को फिर से बैठाए जाने से कम में उनकी महŸवकांक्षा शांत होनेवाली नहीं थी। अंगे्रजी राज्यसŸाा की जंजीरों को तोड़कर सारा हिंदुस्थान फिर से एक बार स्वतंत्र करने के सिवाय उन्हें और कुछ भी सूझ नहीं रहा था। उनका धर्म कल श्रेष्ठ पद पर आसीन हो चुका था। कल तक वह धर्म राजधर्म की प्रतिष्ठा पा चुका था। परंतु आज वह हीन सेवाधर्म हो गया था। यह उनकी
बुरे शासन जैसी ही घृणा हो गई थी। स्वराज्य स्थापित कर उसपर वाजिद अली शाह को फिर से बैठाए जाने से कम में उनकी महŸवकांक्षा शांत होनेवाली नहीं थी। अंगे्रजी राज्यसŸाा की जंजीरों को तोड़कर सारा हिंदुस्थान फिर से एक बार स्वतंत्र करने के सिवाय उन्हें और कुछ भी सूझ नहीं रहा था। उनका धर्म कल श्रेष्ठ पद पर आसीन हो चुका था। कल तक वह धर्म राजधर्म की प्रतिष्ठा पा चुका था। परंतु आज वह हीन सेवाधर्म हो गया था। यह उनकी