1857 का स्वातंत्र्य समर - 205
खड़ा किया गया जिससे इधर-उधर लोक क्षोभ की अग्नि प्रज्वलित होने लगी। इस अग्नि क चिनगारियां बीच में ही गलती से कैसे उड़ी, यह पहले कहा है। खुद मौलवी सिकंदर शाह को राजद्रोह के अपराध के कारण पहले फांसी और बाद में कारावास का दंड दिया गया और 7वीं रेजिमेंट को निःशस्त्र किया गया। सर हेनरी लाॅरेंस ने लश्कर को यथासंभव नियंत्रण में रखने के लिए 12 मई को एक बड़ा दरबार आयोजित किया।
1857 का स्वातंत्र्य समर - 205
खड़ा किया गया जिससे इधर-उधर लोक क्षोभ की अग्नि प्रज्वलित होने लगी। इस अग्नि क चिनगारियां बीच में ही गलती से कैसे उड़ी, यह पहले कहा है। खुद मौलवी सिकंदर शाह को राजद्रोह के अपराध के कारण पहले फांसी और बाद में कारावास का दंड दिया गया और 7वीं रेजिमेंट को निःशस्त्र किया गया। सर हेनरी लाॅरेंस ने लश्कर को यथासंभव नियंत्रण में रखने के लिए 12 मई को एक बड़ा दरबार आयोजित किया।