दूसरा दिन उदय हो जाने के बाद भी विद्रोह न होता-ऐसा बार-बार होता रहा। 30 मई को लाॅरेंस को किसी अधिकारी ने समाचार दिया कि आज रात नौ बजे विद्रोह होगा।
30 मई का सूर्यास्त हो गया। हेनरी लाॅरेंस अपने साथियों सहित भोजन करने बैठा था, तभी रात नौ बजे की तोप की आवाज हुई। जिसने इस बार विद्रोह होने का पक्का समाचार दिया था वह पहले की तरह ही गलत हुआ, इसलिए लाॅरेंस ने उसकी
1857 का स्वातंत्र्य समर - 206
ओर झुककर कहा,
दूसरा दिन उदय हो जाने के बाद भी विद्रोह न होता-ऐसा बार-बार होता रहा। 30 मई को लाॅरेंस को किसी अधिकारी ने समाचार दिया कि आज रात नौ बजे विद्रोह होगा।
30 मई का सूर्यास्त हो गया। हेनरी लाॅरेंस अपने साथियों सहित भोजन करने बैठा था, तभी रात नौ बजे की तोप की आवाज हुई। जिसने इस बार विद्रोह होने का पक्का समाचार दिया था वह पहले की तरह ही गलत हुआ, इसलिए लाॅरेंस ने उसकी
1857 का स्वातंत्र्य समर - 206
ओर झुककर कहा,