माता डगमगाई और पचास वर्षों की अवश्यंभावी मूच्र्छा में धराशायी हो गई।
पचास वर्ष व्यतीत हो गए, परंतु हे अशांत शूरवीरों ! विश्वास करो कि तुम्हारी हीरक जयंती तुम्हारी इच्छाओं की पूर्ति किए बिना नहीं संपन्न होगी। हमने तुम्हारी गर्जना को सुना है और हम उससे साहस प्राप्त करते हैं। अपने सीमित साधनों के बल पर आपने न केवल निरंकुश शासन के, बल्कि निरकुंश शासन और विश्वासघात दोनांे के विरूद्ध लंबा युद्ध लड़ा। दोआब
माता डगमगाई और पचास वर्षों की अवश्यंभावी मूच्र्छा में धराशायी हो गई।
पचास वर्ष व्यतीत हो गए, परंतु हे अशांत शूरवीरों ! विश्वास करो कि तुम्हारी हीरक जयंती तुम्हारी इच्छाओं की पूर्ति किए बिना नहीं संपन्न होगी। हमने तुम्हारी गर्जना को सुना है और हम उससे साहस प्राप्त करते हैं। अपने सीमित साधनों के बल पर आपने न केवल निरंकुश शासन के, बल्कि निरकुंश शासन और विश्वासघात दोनांे के विरूद्ध लंबा युद्ध लड़ा। दोआब