1857 का स्वातंत्र्य समर - 1857 Ka Svatantrya Samar

इस चिंता ने उन्हें बेचैन कर दिया। अपने बाल-बच्चे लखनऊ की ओर भेजें तो लखनऊ के रास्तों पर विद्रोहियों की पक्की नाकाबंदी होने से उधर जाना कठिन था और फैजाबाद शहर में दो-दो हाथ करने की तैयारी की जाए तो वहां पूरी सेना नेटिव थी। ऐसी विकट विवशता मंे फंसे फैजाबाद के अंगे्रज अधिकारी अंत में राजा मान सिंह की शरण गए। अवध प्रांत के सारे हिंदू लोगों का राजा मानसिंह की तलवार म्यान के बाहर ही रहती थी। सन् 1857 के


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इस चिंता ने उन्हें बेचैन कर दिया। अपने बाल-बच्चे लखनऊ की ओर भेजें तो लखनऊ के रास्तों पर विद्रोहियों की पक्की नाकाबंदी होने से उधर जाना कठिन था और फैजाबाद शहर में दो-दो हाथ करने की तैयारी की जाए तो वहां पूरी सेना नेटिव थी। ऐसी विकट विवशता मंे फंसे फैजाबाद के अंगे्रज अधिकारी अंत में राजा मान सिंह की शरण गए। अवध प्रांत के सारे हिंदू लोगों का राजा मानसिंह की तलवार म्यान के बाहर ही रहती थी। सन् 1857 के


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