उस युक्ति का आरम्भ मात्र पढ़ कर ही उन पृष्ठों की सारी बातें मैं समझ लेता था।’’ (श्री रामकृष्ण लीला प्रसंग, तृतीय खंड, पृष्ठ. 60-61)
अपनी इस असाधारण प्रतिभा से नरेन्द्र ने विवेकानन्द बनने पर जर्मनी के प्रसिद्व वेदान्ती डाॅ. डायसन को कैसे चकित किया, यह हम डाॅ. डायसन से भेंट के समय लिखेंगे।
अध्ययन का उद्देश्य सत्य की खोज था और नरेन्द्र जिसे सत्य समझ लेता था, उसकी जी-जान से रक्षा करता था। जब देखता था कि कोई दूसरा उसके
उस युक्ति का आरम्भ मात्र पढ़ कर ही उन पृष्ठों की सारी बातें मैं समझ लेता था।’’ (श्री रामकृष्ण लीला प्रसंग, तृतीय खंड, पृष्ठ. 60-61)
अपनी इस असाधारण प्रतिभा से नरेन्द्र ने विवेकानन्द बनने पर जर्मनी के प्रसिद्व वेदान्ती डाॅ. डायसन को कैसे चकित किया, यह हम डाॅ. डायसन से भेंट के समय लिखेंगे।
अध्ययन का उद्देश्य सत्य की खोज था और नरेन्द्र जिसे सत्य समझ लेता था, उसकी जी-जान से रक्षा करता था। जब देखता था कि कोई दूसरा उसके