दूसरी यात्रा पर गए तो भगिनी निवेदिता और स्वामी तुरीयानन्द उनके साथ थे। तुरीयानन्द ने कुछ संस्कृत ग्रंथ साथ ले जाने को कहा तो विवेकानन्द बोले, ‘‘पिछली बार उन्होंने एक योद्धा देखा था, इस बार मैं उन्हें एक ब्राह्यण दिखाना चाहता हूं।’’
विवेकानन्द का जन्म क्षत्रिय कुल में हुआ था और रामकृष्ण परमहंस को गुरू धारण करके उन्होंने दूसरा जन्म लिया। यांे उनके व्यक्तित्व में क्षत्रियत्व और ब्रह्यत्व का समन्वय हुआ था। पहली बार जब वे शिकागो धर्म-महासभा में गए,
दूसरी यात्रा पर गए तो भगिनी निवेदिता और स्वामी तुरीयानन्द उनके साथ थे। तुरीयानन्द ने कुछ संस्कृत ग्रंथ साथ ले जाने को कहा तो विवेकानन्द बोले, ‘‘पिछली बार उन्होंने एक योद्धा देखा था, इस बार मैं उन्हें एक ब्राह्यण दिखाना चाहता हूं।’’
विवेकानन्द का जन्म क्षत्रिय कुल में हुआ था और रामकृष्ण परमहंस को गुरू धारण करके उन्होंने दूसरा जन्म लिया। यांे उनके व्यक्तित्व में क्षत्रियत्व और ब्रह्यत्व का समन्वय हुआ था। पहली बार जब वे शिकागो धर्म-महासभा में गए,