तब उन्होंने रजोगुण मूलक क्षत्रिय योद्धा की भूमिका अदा की थी। लेकिन अब जब वे पश्चिम की दूसरी यात्रा पर जा रहे थे, तो एशिया जाग उठा था और भारत पर ब्रिटिश साम्राज्यवाद का सांस्कृतिक आक्रमण पराजित हो चुका था। अब उन्हें तर्क-वितर्क नहीं करना था, बल्कि सात्त्विक ब्राह्याम के शान्त और सौम्य रूप में यूरोप वालों को इस विजय का आभास कराना था। ऐतिहासिक संदर्भ बदल जाने से राष्ट्रीय एकता के ध्येय में जो परिवर्तन आया था, उसे उन्होंने
तब उन्होंने रजोगुण मूलक क्षत्रिय योद्धा की भूमिका अदा की थी। लेकिन अब जब वे पश्चिम की दूसरी यात्रा पर जा रहे थे, तो एशिया जाग उठा था और भारत पर ब्रिटिश साम्राज्यवाद का सांस्कृतिक आक्रमण पराजित हो चुका था। अब उन्हें तर्क-वितर्क नहीं करना था, बल्कि सात्त्विक ब्राह्याम के शान्त और सौम्य रूप में यूरोप वालों को इस विजय का आभास कराना था। ऐतिहासिक संदर्भ बदल जाने से राष्ट्रीय एकता के ध्येय में जो परिवर्तन आया था, उसे उन्होंने