उसके बारे में क्या राय रखता है या उसकी निन्दा करता है-इस बात की उसे ज़रा भी परवाह नहीं थी। उसका हृदय शुद्व था और वह खुद पीठ-पीछे किसी की निंदा या बुराई नहीं करता था। धीरे-धीरे जब उसका यह स्वभाव उजागर हुआ तो विद्यार्थी उसकी बात ध्यान से सुनते और उसका आदर करने लगे।
जनरल असेम्बली कालेज के अध्यक्ष विलियम हेस्टी सज्जन व्यक्ति होने के अलावा बड़े विद्वान, कवि और दार्शनिक थे। नरेन्द्र, ब्रजेन्द्र आदि कुछ प्रतिभाशाली विद्यार्थी
उसके बारे में क्या राय रखता है या उसकी निन्दा करता है-इस बात की उसे ज़रा भी परवाह नहीं थी। उसका हृदय शुद्व था और वह खुद पीठ-पीछे किसी की निंदा या बुराई नहीं करता था। धीरे-धीरे जब उसका यह स्वभाव उजागर हुआ तो विद्यार्थी उसकी बात ध्यान से सुनते और उसका आदर करने लगे।
जनरल असेम्बली कालेज के अध्यक्ष विलियम हेस्टी सज्जन व्यक्ति होने के अलावा बड़े विद्वान, कवि और दार्शनिक थे। नरेन्द्र, ब्रजेन्द्र आदि कुछ प्रतिभाशाली विद्यार्थी