संस्था थी। अधिवेशन में आने वाले प्रतिनिधियों के लिए फस्र्ट क्लास और सेकंड क्लास के किराए में सरकार की ओर से रियायतें मिलती थी। इसके टाई वाले एंग्लीकृत देशभक्तों से विवेकानन्द को कुछ भी आशा नहीं थी। उनका विचार था कि एक वेद-विद्यालय स्थापित करके देश के लिए जीवन अर्पित कर देने वाले आचार्य तथा प्रचारक संन्यासी तैयार किए जाएं। संस्कृत, साहित्य, दर्शन, वेद और उपनिषदों की शिक्षा दी जाए। दूसरे वे गंगातट पर स्वामी रामकृष्ण की
संस्था थी। अधिवेशन में आने वाले प्रतिनिधियों के लिए फस्र्ट क्लास और सेकंड क्लास के किराए में सरकार की ओर से रियायतें मिलती थी। इसके टाई वाले एंग्लीकृत देशभक्तों से विवेकानन्द को कुछ भी आशा नहीं थी। उनका विचार था कि एक वेद-विद्यालय स्थापित करके देश के लिए जीवन अर्पित कर देने वाले आचार्य तथा प्रचारक संन्यासी तैयार किए जाएं। संस्कृत, साहित्य, दर्शन, वेद और उपनिषदों की शिक्षा दी जाए। दूसरे वे गंगातट पर स्वामी रामकृष्ण की