विधवा पत्नी के निर्देशन में बेलूर मठ जैसा एक मठ स्त्रियों के लिए स्थापित करना चाहते थे।
जनवरी 1902 में विवेकानन्द बौद्व गया की यात्रा पर गए और वहां से लौटकर कुछ दिनों काशी में विश्राम किया। मार्च के महीने बेलूर मठ में वापस आए तो स्वास्थ्य बहुत बिगड़ गया था। अब उनके लिए चारपाई से उठना कठिन था। रामकृष्ण के जन्मोत्सव पर कोई तीस हज़ार व्यक्ति मठ में आए। बहुत-से लोग उनसे मिलने और बातचीत करने के इच्छुक थे, पर बीमारी के कारण उनकी साध पूरी न हो सकी।
विधवा पत्नी के निर्देशन में बेलूर मठ जैसा एक मठ स्त्रियों के लिए स्थापित करना चाहते थे।
जनवरी 1902 में विवेकानन्द बौद्व गया की यात्रा पर गए और वहां से लौटकर कुछ दिनों काशी में विश्राम किया। मार्च के महीने बेलूर मठ में वापस आए तो स्वास्थ्य बहुत बिगड़ गया था। अब उनके लिए चारपाई से उठना कठिन था। रामकृष्ण के जन्मोत्सव पर कोई तीस हज़ार व्यक्ति मठ में आए। बहुत-से लोग उनसे मिलने और बातचीत करने के इच्छुक थे, पर बीमारी के कारण उनकी साध पूरी न हो सकी।