लेकिन अब उसने देशव्यापी रूप धारण कर लिया था और बहिष्कार, स्वदेशी, राष्ट्रीय शिक्षा तथा स्वराज-चार सूत्री प्रोग्राम उसका आधार था। कलकत्ता का बेलूर मठ क्रान्तिकारियों की गतिविधियों का केन्द्र बन गया था। और सरकार उसे बन्द कर देने पर विचार कर रही थी। विवेकानन्द को इस आन्दोलन का श्रेय देते हुए रोमां रोलां लिखते हैं:
‘‘विवेकानन्द के निधन के तीन वर्ष पश्चात् तिलक और गंाधी के महान
211 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
आन्दोलन
लेकिन अब उसने देशव्यापी रूप धारण कर लिया था और बहिष्कार, स्वदेशी, राष्ट्रीय शिक्षा तथा स्वराज-चार सूत्री प्रोग्राम उसका आधार था। कलकत्ता का बेलूर मठ क्रान्तिकारियों की गतिविधियों का केन्द्र बन गया था। और सरकार उसे बन्द कर देने पर विचार कर रही थी। विवेकानन्द को इस आन्दोलन का श्रेय देते हुए रोमां रोलां लिखते हैं:
‘‘विवेकानन्द के निधन के तीन वर्ष पश्चात् तिलक और गंाधी के महान
211 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
आन्दोलन