के श्रीगणेश के रूप में जो संगठित जन-आन्दोलन उठे वे सब ‘मद्रास के संदेश’ में निहित ‘आगे बढ़ो’ की गुरू-गम्भीर पुकार के कारण हुए, जिसने बहुतों को जगाया है। इस आजेस्वी संदेश का देाहरा अर्थ था-एक देश के लिए और दूसरा विश्व के लिए। अद्वैतवादी विवेकानन्द के मन में उसका व्यापक अभिप्राय ही प्रधान था, परन्तु भारत का पुन्रूज्जीवन देसरे अर्थ ही ने किया। उससे राष्ट्रवाद की वह उत्कृष्ट लालसा तृप्त होती थी, जिससे आज संसार ग्रस्त है, जिसका
के श्रीगणेश के रूप में जो संगठित जन-आन्दोलन उठे वे सब ‘मद्रास के संदेश’ में निहित ‘आगे बढ़ो’ की गुरू-गम्भीर पुकार के कारण हुए, जिसने बहुतों को जगाया है। इस आजेस्वी संदेश का देाहरा अर्थ था-एक देश के लिए और दूसरा विश्व के लिए। अद्वैतवादी विवेकानन्द के मन में उसका व्यापक अभिप्राय ही प्रधान था, परन्तु भारत का पुन्रूज्जीवन देसरे अर्थ ही ने किया। उससे राष्ट्रवाद की वह उत्कृष्ट लालसा तृप्त होती थी, जिससे आज संसार ग्रस्त है, जिसका