योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

आज तक उस आंचल में किसी न किसी रूप में विद्यमान है। (वही, पृष्ठ83-84)

234 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

मांस खाने, न खाने के विवाद पर अपनी राय व्यक्त करते हुए उन्होंने लिखा है, ‘‘जिनका उद्देश्य धार्मिक जीवन है, उनके लिए निरामिष भोजन अच्छा है और जिसे रात-दिन परिश्रम करके प्रतिद्वंदिता के बीच में जीवन नौका खेनी है, उसे मांस खाना ही होगा। जितने दिन बलवान की जय का भाव मानव-समाज में रहेगा, उतने दिन मांस खाना ही पड़ेगा। अथवा


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आज तक उस आंचल में किसी न किसी रूप में विद्यमान है। (वही, पृष्ठ83-84)

234 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द

मांस खाने, न खाने के विवाद पर अपनी राय व्यक्त करते हुए उन्होंने लिखा है, ‘‘जिनका उद्देश्य धार्मिक जीवन है, उनके लिए निरामिष भोजन अच्छा है और जिसे रात-दिन परिश्रम करके प्रतिद्वंदिता के बीच में जीवन नौका खेनी है, उसे मांस खाना ही होगा। जितने दिन बलवान की जय का भाव मानव-समाज में रहेगा, उतने दिन मांस खाना ही पड़ेगा। अथवा


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