किसी दूसरे प्रकार की मांस जैसी उपयोगी चीज खाने के लिए ढूंढ निकालनी होगी। नहीं तो बलवानों के पैर के नीचे बलहीन पिस जायेंगे’’ (पृष्ठ 76)
मानव-समाज के विकास के साथ-साथ भोजन तथा कपड़े संबंधी मनुष्य के आचार-व्यवहार कैसे बदले हैं और विभिन्न देशों तथा विभिन्न जातियों में उनके क्या-क्या रूप हैं, उन्होंने यह सब दिखाया है। अंत में आर्थिक उन्नति तथा समृद्वि का सौंदर्य-भावना और संस्कृति से जो संबंध हैं, उस पर यों प्रकाश डाला है:
किसी दूसरे प्रकार की मांस जैसी उपयोगी चीज खाने के लिए ढूंढ निकालनी होगी। नहीं तो बलवानों के पैर के नीचे बलहीन पिस जायेंगे’’ (पृष्ठ 76)
मानव-समाज के विकास के साथ-साथ भोजन तथा कपड़े संबंधी मनुष्य के आचार-व्यवहार कैसे बदले हैं और विभिन्न देशों तथा विभिन्न जातियों में उनके क्या-क्या रूप हैं, उन्होंने यह सब दिखाया है। अंत में आर्थिक उन्नति तथा समृद्वि का सौंदर्य-भावना और संस्कृति से जो संबंध हैं, उस पर यों प्रकाश डाला है: