योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

किसी दूसरे प्रकार की मांस जैसी उपयोगी चीज खाने के लिए ढूंढ निकालनी होगी। नहीं तो बलवानों के पैर के नीचे बलहीन पिस जायेंगे’’ (पृष्ठ 76)

मानव-समाज के विकास के साथ-साथ भोजन तथा कपड़े संबंधी मनुष्य के आचार-व्यवहार कैसे बदले हैं और विभिन्न देशों तथा विभिन्न जातियों में उनके क्या-क्या रूप हैं, उन्होंने यह सब दिखाया है। अंत में आर्थिक उन्नति तथा समृद्वि का सौंदर्य-भावना और संस्कृति से जो संबंध हैं, उस पर यों प्रकाश डाला है:


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किसी दूसरे प्रकार की मांस जैसी उपयोगी चीज खाने के लिए ढूंढ निकालनी होगी। नहीं तो बलवानों के पैर के नीचे बलहीन पिस जायेंगे’’ (पृष्ठ 76)

मानव-समाज के विकास के साथ-साथ भोजन तथा कपड़े संबंधी मनुष्य के आचार-व्यवहार कैसे बदले हैं और विभिन्न देशों तथा विभिन्न जातियों में उनके क्या-क्या रूप हैं, उन्होंने यह सब दिखाया है। अंत में आर्थिक उन्नति तथा समृद्वि का सौंदर्य-भावना और संस्कृति से जो संबंध हैं, उस पर यों प्रकाश डाला है:


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