आप सोचते हैं कि टप्पा को नाक में गाते हुए बिजली के समान एक स्वर से दूसरे स्वर में दौड़ना कोई उत्कृष्ट संगीत है ? नहीं, जब तक प्रत्येक नहीं हो सकती।’’ (पृष्ठ 246)
विवेकानन्द जब दूसरी विदेश-यात्रा पर गये थे तो उन्होंने पेरिस की धर्मतिहास सभा में पाश्चात्य विद्वानों की इस मिथ्या धारणा का खंडन किया कि भारत नाटक चित्र तथा गणित इत्यादि विद्याओं में यूनान से प्रभावित है। उनके ये विचार ‘पेरिस प्रदर्शनी’ लेख में संग्रहीत हैं,
आप सोचते हैं कि टप्पा को नाक में गाते हुए बिजली के समान एक स्वर से दूसरे स्वर में दौड़ना कोई उत्कृष्ट संगीत है ? नहीं, जब तक प्रत्येक नहीं हो सकती।’’ (पृष्ठ 246)
विवेकानन्द जब दूसरी विदेश-यात्रा पर गये थे तो उन्होंने पेरिस की धर्मतिहास सभा में पाश्चात्य विद्वानों की इस मिथ्या धारणा का खंडन किया कि भारत नाटक चित्र तथा गणित इत्यादि विद्याओं में यूनान से प्रभावित है। उनके ये विचार ‘पेरिस प्रदर्शनी’ लेख में संग्रहीत हैं,