के बड़प्पन का भाव प्रदर्शित नहीं करते थे।’’ (रामकृृष्ण, पृष्ठ 2014)
एक दिन की बात है कि केशवचन्द्र सेन, विजयकृष्ण गोस्वामी आदि ब्रह्मसमाज के कुछ प्रसिद्व नेता रामकृष्ण के पास बैठे थे। नरेन्द्र भी वहां मौजूद था। परमहंस भावावेश में उनकी ओर देखते और बातें करते रहे। लेकिन जब वे चले गए तो रामकृष्ण ने अपने भक्तों को मुखातिब करके कहा, ‘‘भाव में मैंने देखा, केशव ने जिस एक शक्ति के बल पर प्रतिष्ठा प्राप्त की है, नरेन्द्र में
के बड़प्पन का भाव प्रदर्शित नहीं करते थे।’’ (रामकृृष्ण, पृष्ठ 2014)
एक दिन की बात है कि केशवचन्द्र सेन, विजयकृष्ण गोस्वामी आदि ब्रह्मसमाज के कुछ प्रसिद्व नेता रामकृष्ण के पास बैठे थे। नरेन्द्र भी वहां मौजूद था। परमहंस भावावेश में उनकी ओर देखते और बातें करते रहे। लेकिन जब वे चले गए तो रामकृष्ण ने अपने भक्तों को मुखातिब करके कहा, ‘‘भाव में मैंने देखा, केशव ने जिस एक शक्ति के बल पर प्रतिष्ठा प्राप्त की है, नरेन्द्र में