की छाया में बैठ गया। वहां पर मेरे कई मित्र भी थे और उनमें से एक
44 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
मित्र भगवान की अपार करूणा का गान करने लगा। यह गान मुझे अपने सिर पर जान-बुझकर किया गया प्रहार जान पड़ा। अपनी माता और भाइयों की असहाय अवस्था याद कर मैं चिल्ला उठा, ‘यह गाना बंद करो? जो लोग अमीरों के घरों में पैदा हुए हैं और जिनके माता-पिता भूख से नहीं मर रहे हैं, उनके कानों में यह गान सुधारवर्षण कर सकता है। हां! एक समय था, जब
की छाया में बैठ गया। वहां पर मेरे कई मित्र भी थे और उनमें से एक
44 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
मित्र भगवान की अपार करूणा का गान करने लगा। यह गान मुझे अपने सिर पर जान-बुझकर किया गया प्रहार जान पड़ा। अपनी माता और भाइयों की असहाय अवस्था याद कर मैं चिल्ला उठा, ‘यह गाना बंद करो? जो लोग अमीरों के घरों में पैदा हुए हैं और जिनके माता-पिता भूख से नहीं मर रहे हैं, उनके कानों में यह गान सुधारवर्षण कर सकता है। हां! एक समय था, जब