योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

मैं भी इसी प्रकार सोचा करता था! परंतु अब जब मैं जीवन की निष्ठुरताओं के सम्मुख खड़ा हुआ हूं, यह गाना मेरे कानों में एक भयानक उपहास के समान चोट करता है। ‘‘मेरे मित्र को इससे चोट पहुंची। उसे मेरी भयानक आपत्िा का कोई ज्ञान न था। अनेक बार जब मै। देखता था कि घर में खाने को पर्याप्त भोजन नहीं है, मैं अपनी मां से यह बहाना करके कि मुझे एक दोस्त ने निमंत्रित किया है, भूखा रह जाता था। मेरे धनी मित्र मुझे दुर्भाग्य के बारे में कौतुहल


187 of 1197

मैं भी इसी प्रकार सोचा करता था! परंतु अब जब मैं जीवन की निष्ठुरताओं के सम्मुख खड़ा हुआ हूं, यह गाना मेरे कानों में एक भयानक उपहास के समान चोट करता है। ‘‘मेरे मित्र को इससे चोट पहुंची। उसे मेरी भयानक आपत्िा का कोई ज्ञान न था। अनेक बार जब मै। देखता था कि घर में खाने को पर्याप्त भोजन नहीं है, मैं अपनी मां से यह बहाना करके कि मुझे एक दोस्त ने निमंत्रित किया है, भूखा रह जाता था। मेरे धनी मित्र मुझे दुर्भाग्य के बारे में कौतुहल


187 of 1197