कोई अपना दुख-कष्ट कुछ समय तक भूल जाने के लिए शराब पीता है या वेश्या के पास जाता है, तो मैं इसमें कुछ भी दोष नहीं समझता। अगर वैसे ही उपायों से मैं भी अपना दुख भूल सकंू, जिस दिन यह बात मेरी समझ में आ जाएगी। मैं भी ऐसे काम करने से पीछे नहीं हटूंगा।
45 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
उसकी ये बातें विविध प्रकार से विकृत होकर दक्षिणेश्वर में परमहंस के शिष्यों और कलकत्ता में उनके भक्तों तक पहुंची। लिखा है, ‘‘कोई-कोई मेरी स्थिति
कोई अपना दुख-कष्ट कुछ समय तक भूल जाने के लिए शराब पीता है या वेश्या के पास जाता है, तो मैं इसमें कुछ भी दोष नहीं समझता। अगर वैसे ही उपायों से मैं भी अपना दुख भूल सकंू, जिस दिन यह बात मेरी समझ में आ जाएगी। मैं भी ऐसे काम करने से पीछे नहीं हटूंगा।
45 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
उसकी ये बातें विविध प्रकार से विकृत होकर दक्षिणेश्वर में परमहंस के शिष्यों और कलकत्ता में उनके भक्तों तक पहुंची। लिखा है, ‘‘कोई-कोई मेरी स्थिति