योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

तर्को की अवतारणा करने लग जाता था। यह जानकर कि वे लोग इस बात पर विश्वास करके चले गए कि मैं पतित हो गया हूं-मुझे प्रसन्नता ही हुई और सोचा कि ठाकुर भी उनके मुख से सुनकर इस पर विश्वास कर लेंगे। पर ऐसी ंिचंता मन में उठने से मैं फिर हताश हो गया। निश्चय किया-वे जो चाहे माने-मनुष्यों के मता-मतों को मूल्य ही जब तुच्छ है तो उससे मेरी क्या हानि है? परन्तु बाद में सुनकर मैं स्ताम्भित हो गया कि ठाकुर ने उन बातों को सुनकर पहले कुछ नहीं कहा। बाद में भवनाथ ने रोते हुए जब उनसे कहा,


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तर्को की अवतारणा करने लग जाता था। यह जानकर कि वे लोग इस बात पर विश्वास करके चले गए कि मैं पतित हो गया हूं-मुझे प्रसन्नता ही हुई और सोचा कि ठाकुर भी उनके मुख से सुनकर इस पर विश्वास कर लेंगे। पर ऐसी ंिचंता मन में उठने से मैं फिर हताश हो गया। निश्चय किया-वे जो चाहे माने-मनुष्यों के मता-मतों को मूल्य ही जब तुच्छ है तो उससे मेरी क्या हानि है? परन्तु बाद में सुनकर मैं स्ताम्भित हो गया कि ठाकुर ने उन बातों को सुनकर पहले कुछ नहीं कहा। बाद में भवनाथ ने रोते हुए जब उनसे कहा,


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