योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



‘‘बम्बई से कोलम्बो पहुंचा। हमारा स्अीमर वहां प्रायः दिन-भर ठहरा था। इस बीच स्अीमर से उतरकर मुझे शहर देखने का अवसर मिला। हम सड़कों पर मोटर-गाड़ी से गए, वहां की और सब वस्तुओं में बुद्वदेव की निर्वाण के समय की लेटी हुई मर्ति की याद मेरे मन मंे अभी तक ताज़ी है।...’’

‘‘दूसरा स्टेशन पेनांग था, जो मलय प्रायद्वीप में समुद्र के किनारे एक छोटा-सा टापू है। मलयनिवासी सब मुसलमान हैं। किसी ज़माने में ये लोग मशहुर समुद्र डाकू थे और


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‘‘बम्बई से कोलम्बो पहुंचा। हमारा स्अीमर वहां प्रायः दिन-भर ठहरा था। इस बीच स्अीमर से उतरकर मुझे शहर देखने का अवसर मिला। हम सड़कों पर मोटर-गाड़ी से गए, वहां की और सब वस्तुओं में बुद्वदेव की निर्वाण के समय की लेटी हुई मर्ति की याद मेरे मन मंे अभी तक ताज़ी है।...’’

‘‘दूसरा स्टेशन पेनांग था, जो मलय प्रायद्वीप में समुद्र के किनारे एक छोटा-सा टापू है। मलयनिवासी सब मुसलमान हैं। किसी ज़माने में ये लोग मशहुर समुद्र डाकू थे और


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