वहां पैसे के लिए हाय-तौबा मची हुई थी। अमेरिका के अभिजात वर्ग का जीवन कितना सतही तथा विडम्बना पूर्ण था, इसके बारे में लिखा है:
‘‘वरदाराव ने जिस महिला से मेरा परिचय करा दिया था, वे और उनके पति
78 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
शिकागो समाज के बड़े गणमान्य व्यक्ति हैं। उन्होंने मुझसे बहुत अच्छा बर्ताव किया। परन्तु यहां के लोग विदेशियों का जो सत्कार करते हैं, वह केवल औरों को दिखाने ही के लिए है, धन की सहायता करते समय-प्रायः सभी मुंह मोड़ लेते है।’’
वहां पैसे के लिए हाय-तौबा मची हुई थी। अमेरिका के अभिजात वर्ग का जीवन कितना सतही तथा विडम्बना पूर्ण था, इसके बारे में लिखा है:
‘‘वरदाराव ने जिस महिला से मेरा परिचय करा दिया था, वे और उनके पति
78 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
शिकागो समाज के बड़े गणमान्य व्यक्ति हैं। उन्होंने मुझसे बहुत अच्छा बर्ताव किया। परन्तु यहां के लोग विदेशियों का जो सत्कार करते हैं, वह केवल औरों को दिखाने ही के लिए है, धन की सहायता करते समय-प्रायः सभी मुंह मोड़ लेते है।’’