उद्योग और कला में जो उन्नति की, वह यहां प्रदर्शित हुई थी।
धर्म-महासभा भी इसी उपलक्ष्य में बुलाई गई थी। उसके अलावा शिक्षा, दर्शन, उद्योग और समाज-संबंधी विषयों पर अलग-अलग सम्मेलन हुए, जिनमें लगभग छः हज़ार पत्र पढ़े गए और उन्हें सात लाख श्रोताओं ने सुना।
विवेकानन्द शिकागो में ग्यारह दिन रूके और वे हर रोज़ प्रदर्शनी देखने जाते रहे। विज्ञान के नये-नये आविष्कार, कई प्रकार के छोटे-बड़े यंत्र और तरह-तरह की विचित्र वस्तुएं देखकर
उद्योग और कला में जो उन्नति की, वह यहां प्रदर्शित हुई थी।
धर्म-महासभा भी इसी उपलक्ष्य में बुलाई गई थी। उसके अलावा शिक्षा, दर्शन, उद्योग और समाज-संबंधी विषयों पर अलग-अलग सम्मेलन हुए, जिनमें लगभग छः हज़ार पत्र पढ़े गए और उन्हें सात लाख श्रोताओं ने सुना।
विवेकानन्द शिकागो में ग्यारह दिन रूके और वे हर रोज़ प्रदर्शनी देखने जाते रहे। विज्ञान के नये-नये आविष्कार, कई प्रकार के छोटे-बड़े यंत्र और तरह-तरह की विचित्र वस्तुएं देखकर