स्वामी बालक के सदृश हुलस उठे। मेले की इमारतें वास्तुकला का शाहकार थी। मुख्य इमारतों के मध्य जो विशाल चैक था, उसमें स्वाधीनता की भव्य मूर्ति थी। एक तरफ विशाल फववारा और दूसरी तरफ स्तम्भ पंक्ति थी। मेले की विशिष्ट वस्तु इंजीनियर डबल्यू. जी. फेरिस का फेरिस हृील था, जो खासतौर पर इसी अवसर के लिए बनाया गया था। विवेकानन्द ने दस-ग्यारह दिन तक इस प्रदर्शनी को देखा, फिर भी मन नहीं भरा।
विज्ञान और नये के प्रति उनके मन में जो आकर्षण था,
स्वामी बालक के सदृश हुलस उठे। मेले की इमारतें वास्तुकला का शाहकार थी। मुख्य इमारतों के मध्य जो विशाल चैक था, उसमें स्वाधीनता की भव्य मूर्ति थी। एक तरफ विशाल फववारा और दूसरी तरफ स्तम्भ पंक्ति थी। मेले की विशिष्ट वस्तु इंजीनियर डबल्यू. जी. फेरिस का फेरिस हृील था, जो खासतौर पर इसी अवसर के लिए बनाया गया था। विवेकानन्द ने दस-ग्यारह दिन तक इस प्रदर्शनी को देखा, फिर भी मन नहीं भरा।
विज्ञान और नये के प्रति उनके मन में जो आकर्षण था,