तो पत्नी का एक साल पहले देहान्त हो चुका था। उन्होंने अपने बालक पुत्र विश्वनाथ को आशीर्वाद दिया और चले गए। इसके बाद उन्होंने अपने बालक पुत्र विश्वनाथ को आर्शीवाद दिया और चले गए। इसके बाद उन्होंने फिर कभी घर में कदम नहीं रखा और न किसी ने उन्हें देखा।
यह विश्वनाथ ही नरेन्द्रनाथ के पिता थे। उन्होंने भी वकालत का पैत्रिक धंधा अपनाया था। लेकिन वकालत में व्यस्त रहते हुए भी पारिवारिक परम्परा के अनुसार शास्त्र-चर्चा तथा अध्ययन
तो पत्नी का एक साल पहले देहान्त हो चुका था। उन्होंने अपने बालक पुत्र विश्वनाथ को आशीर्वाद दिया और चले गए। इसके बाद उन्होंने अपने बालक पुत्र विश्वनाथ को आर्शीवाद दिया और चले गए। इसके बाद उन्होंने फिर कभी घर में कदम नहीं रखा और न किसी ने उन्हें देखा।
यह विश्वनाथ ही नरेन्द्रनाथ के पिता थे। उन्होंने भी वकालत का पैत्रिक धंधा अपनाया था। लेकिन वकालत में व्यस्त रहते हुए भी पारिवारिक परम्परा के अनुसार शास्त्र-चर्चा तथा अध्ययन