में ले गई और कहा कि सुबह भोजन के बाद वह स्वयं उन्हें वहां छोड़ आएगी। इस रमणी का नाम कुमारी मेरी हेल था। वह और उसकी मां बाद में स्वामी जी की अनन्य भक्त बन गई और बड़ी सहायक सिद्व हुई।
भोजन और विश्राम के बाद कुमारी हेल उन्हें धर्म-महासभा के दफ्तर में ले गई। उन्हें वहां हिन्दू धर्म के प्रतिनिधि के रूप में ले लिया गया और जिस मकान
81 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
में प्रतिनिधियों के रहने की व्यवस्था की गई थी, उसमें वे अतिथि के रूप मंे रहने लगे।
में ले गई और कहा कि सुबह भोजन के बाद वह स्वयं उन्हें वहां छोड़ आएगी। इस रमणी का नाम कुमारी मेरी हेल था। वह और उसकी मां बाद में स्वामी जी की अनन्य भक्त बन गई और बड़ी सहायक सिद्व हुई।
भोजन और विश्राम के बाद कुमारी हेल उन्हें धर्म-महासभा के दफ्तर में ले गई। उन्हें वहां हिन्दू धर्म के प्रतिनिधि के रूप में ले लिया गया और जिस मकान
81 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
में प्रतिनिधियों के रहने की व्यवस्था की गई थी, उसमें वे अतिथि के रूप मंे रहने लगे।