योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

1893 से अगस्त, 1895 तक और फिर नवम्बर, 1895 से अपै्रल, 1896 तक ढाई साल अमेरिका में बिताए। वे जो सपने संजोकर आए थे, आते ही टूट गए। यहां के जीवन का उन पर पहला प्रभाव यह पड़ा, ‘‘ठगी और धोखाधड़ी के लिए यह बढ़िया देश है, यहां के 99ण्9 प्रतिशत लोगों की नीयत, दूसरों से अनुचित लाभ उठाने ही की रहती है। आंख् मूंदी कि पूरे गायब।’’ उन्होंने अपने को जेल से बाहर मछली की तरह अनुभव किया। लेकिन इसके बावजुद उन्होंने अपने को जल से बाहर मछली


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1893 से अगस्त, 1895 तक और फिर नवम्बर, 1895 से अपै्रल, 1896 तक ढाई साल अमेरिका में बिताए। वे जो सपने संजोकर आए थे, आते ही टूट गए। यहां के जीवन का उन पर पहला प्रभाव यह पड़ा, ‘‘ठगी और धोखाधड़ी के लिए यह बढ़िया देश है, यहां के 99ण्9 प्रतिशत लोगों की नीयत, दूसरों से अनुचित लाभ उठाने ही की रहती है। आंख् मूंदी कि पूरे गायब।’’ उन्होंने अपने को जेल से बाहर मछली की तरह अनुभव किया। लेकिन इसके बावजुद उन्होंने अपने को जल से बाहर मछली


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