की तरह अनुभव किया। लेकिन इसके बावजुद उन्होंने बुद्वि को कुंठित नहीं होने दिया और वे जिस उद्देश्य से विदेश आए थे, उसे हमेशा सम्मुख रखा।...धीरे-धीरे भले लोगों से परिचय हुआ, जिनसे उन्हें आदर और स्नेह मिला। धर्म-महासभा में प्राप्त सफलता के बाद तो उनके श्रद्वालुओं तथा भक्तों की संख्या बहुत बढ़ गई। सारे देश में घूम-घूमकर भाषण दिए। जहां कहीं भी गए लोगों ने उन्हें अपने घरों में ठहराया। जैसे-जैसे जन-जीवन से सम्पर्क बढ़ता गया वैसे-वैसे
की तरह अनुभव किया। लेकिन इसके बावजुद उन्होंने बुद्वि को कुंठित नहीं होने दिया और वे जिस उद्देश्य से विदेश आए थे, उसे हमेशा सम्मुख रखा।...धीरे-धीरे भले लोगों से परिचय हुआ, जिनसे उन्हें आदर और स्नेह मिला। धर्म-महासभा में प्राप्त सफलता के बाद तो उनके श्रद्वालुओं तथा भक्तों की संख्या बहुत बढ़ गई। सारे देश में घूम-घूमकर भाषण दिए। जहां कहीं भी गए लोगों ने उन्हें अपने घरों में ठहराया। जैसे-जैसे जन-जीवन से सम्पर्क बढ़ता गया वैसे-वैसे