योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

लड़के जाल में पड़ना नहीं चाहते। आखिर इस तरह ‘लव’ हो जाता है, तब शादी हो जाती है। यह हुई साधारण बात, परन्तु हेल की कन्याएं रूपवती हैं, बड़े आदमी की कन्याएं हैं, विश्वविद्यालय की छात्राएं हैं, नाचने, गाने और पियानो बजाने में अद्वितीय हैं। कितने ही लड़के चक्कर मारते हैं, लेकिन उनकी नज़र में नहीं चढ़ते। जान पड़ता है वे विवाह नहीं करेंगी, तिस पर अब मेरे साथ रहने के कारण महावैराग्य सवार हो गया है। वे इस समय ब्रह्य चिंतन में लगी रहती हैं।


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लड़के जाल में पड़ना नहीं चाहते। आखिर इस तरह ‘लव’ हो जाता है, तब शादी हो जाती है। यह हुई साधारण बात, परन्तु हेल की कन्याएं रूपवती हैं, बड़े आदमी की कन्याएं हैं, विश्वविद्यालय की छात्राएं हैं, नाचने, गाने और पियानो बजाने में अद्वितीय हैं। कितने ही लड़के चक्कर मारते हैं, लेकिन उनकी नज़र में नहीं चढ़ते। जान पड़ता है वे विवाह नहीं करेंगी, तिस पर अब मेरे साथ रहने के कारण महावैराग्य सवार हो गया है। वे इस समय ब्रह्य चिंतन में लगी रहती हैं।


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