कन्या के पति को अपनी स्त्री से मिलने के लिए प्रायः उसके बाप के घर जाना पड़ता है। यहां वाले कहते हैं:
‘ैवद पे ेवद जपसस ीम हमजे ं ूपमि
ज्ीम कंनहीजमत पे कंनहीजमत ंसस ीमत सपमिण्’
82 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
चारों कन्याएं युवती और अविवाहिता हैं। विवाह होना इस देश में महा कठिन कार्य है। पहले तो मन के लायक वह हो, दूसरे घर हो! लड़के यारी में तो बड़े पक्के हैं, परन्तु पकड़ में आने के वक्त नौ दो ग्यारह! लड़कियां नाच-कूदकर किसी को फंसाने की कोशिश करती हैं,
कन्या के पति को अपनी स्त्री से मिलने के लिए प्रायः उसके बाप के घर जाना पड़ता है। यहां वाले कहते हैं:
‘ैवद पे ेवद जपसस ीम हमजे ं ूपमि
ज्ीम कंनहीजमत पे कंनहीजमत ंसस ीमत सपमिण्’
82 योद्धा संन्यासी विवेकानन्द
चारों कन्याएं युवती और अविवाहिता हैं। विवाह होना इस देश में महा कठिन कार्य है। पहले तो मन के लायक वह हो, दूसरे घर हो! लड़के यारी में तो बड़े पक्के हैं, परन्तु पकड़ में आने के वक्त नौ दो ग्यारह! लड़कियां नाच-कूदकर किसी को फंसाने की कोशिश करती हैं,