योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

में एक तरह का नशा हो जाता है। गाड़ियां उस समय नहीं चलतीं, बिना पहिए के स्लेज नाम का एक यान घसीट लिया जाता है। सब कुछ जमकर सख्त हो जाता है; नदी, नाले और झील पर से हाथी भी चल सकता है। नियाग्रावत प्रचंड प्रवाह वाला विशाल निर्झर जमकर पत्थर हो गया है। परन्तु मैं अच्छी तरह हूं। पहले थोड़ा डर मालूम होता था, फिर तो गरज के मारे, रेल से एक दिन कनाडा के समीप, दूसरे दिन अमेरिका के दक्षिण भाग में व्याख्यान देता फिरता हूं। घर की तरह


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में एक तरह का नशा हो जाता है। गाड़ियां उस समय नहीं चलतीं, बिना पहिए के स्लेज नाम का एक यान घसीट लिया जाता है। सब कुछ जमकर सख्त हो जाता है; नदी, नाले और झील पर से हाथी भी चल सकता है। नियाग्रावत प्रचंड प्रवाह वाला विशाल निर्झर जमकर पत्थर हो गया है। परन्तु मैं अच्छी तरह हूं। पहले थोड़ा डर मालूम होता था, फिर तो गरज के मारे, रेल से एक दिन कनाडा के समीप, दूसरे दिन अमेरिका के दक्षिण भाग में व्याख्यान देता फिरता हूं। घर की तरह


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