योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

गाड़िया भी भाप के नलों से खूब गर्म रखी जाती हैं और बाहर चारों तरफ बर्फ के अत्यन्त सफेद ढेर रहते हैं-कैसी अनोखी घटना है।’’

‘‘बड़ा डर था कि मेरी नाक और कान गिर जाएंगे, पर आज तक कुछ नहीं हुआ, बाहर जाते समय ढेरों गर्म कपड़े, उस पर समूर का कोट, जूते, फिर जूते पर एक और ऊनी जूता, इन सब सामानों से ढककर जाना पड़ता है। सांस निकलते ही दाढ़ी में जम जाती है। उस पर तमाशा यह है कि घर के भीतर, बिना एक डली बर्फ दिए ये लोग पानी नहीं पीते।


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गाड़िया भी भाप के नलों से खूब गर्म रखी जाती हैं और बाहर चारों तरफ बर्फ के अत्यन्त सफेद ढेर रहते हैं-कैसी अनोखी घटना है।’’

‘‘बड़ा डर था कि मेरी नाक और कान गिर जाएंगे, पर आज तक कुछ नहीं हुआ, बाहर जाते समय ढेरों गर्म कपड़े, उस पर समूर का कोट, जूते, फिर जूते पर एक और ऊनी जूता, इन सब सामानों से ढककर जाना पड़ता है। सांस निकलते ही दाढ़ी में जम जाती है। उस पर तमाशा यह है कि घर के भीतर, बिना एक डली बर्फ दिए ये लोग पानी नहीं पीते।


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