योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

पीते हैं और उनकी उन्नति के लिए कोई चेष्टा नहीं करते, क्या वह देश है या नरक? क्या वह धर्म है या पिशाच का नृत्य? भाई, इस बात को गौर से समझो-मैं भारतवर्ष को घूम-घूमकर देख चुका और इस देश को भी देखा-क्या बिना कारण के कहीं कार्य होता है? क्या बिना पाप के सज़ा मिल सकती है?’’

उन्होंने देखा, ‘‘पूर्व एवं पश्चिम में सारा अंतर यह है कि वे एक-एक राष्ट्र हैं, हम नहीं; अर्थात् सभ्यता एवं शिक्षा का प्रसार वहां व्यापक है, सर्वसाधारण


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पीते हैं और उनकी उन्नति के लिए कोई चेष्टा नहीं करते, क्या वह देश है या नरक? क्या वह धर्म है या पिशाच का नृत्य? भाई, इस बात को गौर से समझो-मैं भारतवर्ष को घूम-घूमकर देख चुका और इस देश को भी देखा-क्या बिना कारण के कहीं कार्य होता है? क्या बिना पाप के सज़ा मिल सकती है?’’

उन्होंने देखा, ‘‘पूर्व एवं पश्चिम में सारा अंतर यह है कि वे एक-एक राष्ट्र हैं, हम नहीं; अर्थात् सभ्यता एवं शिक्षा का प्रसार वहां व्यापक है, सर्वसाधारण


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