प्रथम कोटि का विचारक पैदा नहीं हुआ। विवेकानन्द ने हमारे देश में लगभग वही भूमिका अदा की है, जो जर्मनी में हेगल ने। हेगल ने जर्मन आदर्शवाद को द्वन्द्वात्मक सिद्वांत द्वारा भौतिकवाद के कगार तक पहुंचा दिया था। हेगल की मान्यता थी कि समाज विचार का प्रतिबिम्ब मात्र है और चूंकि विचार का निरन्तर विकास हो रहा है, यह विकास तब तक होता रहेगा जब तक वह अपनी चरम सीमा को नहीं पहुंच जाता। और हेगल की दृष्टि में जर्मन की तत्कालीन प्रूश्यिन सरकार विकास की चरम सीमा थी,
प्रथम कोटि का विचारक पैदा नहीं हुआ। विवेकानन्द ने हमारे देश में लगभग वही भूमिका अदा की है, जो जर्मनी में हेगल ने। हेगल ने जर्मन आदर्शवाद को द्वन्द्वात्मक सिद्वांत द्वारा भौतिकवाद के कगार तक पहुंचा दिया था। हेगल की मान्यता थी कि समाज विचार का प्रतिबिम्ब मात्र है और चूंकि विचार का निरन्तर विकास हो रहा है, यह विकास तब तक होता रहेगा जब तक वह अपनी चरम सीमा को नहीं पहुंच जाता। और हेगल की दृष्टि में जर्मन की तत्कालीन प्रूश्यिन सरकार विकास की चरम सीमा थी,