योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand

सौगुनी अधिक बुरी दशा को पहुंच गए। इस युद्व से पूर्व ये बेचारे निग्रो कम से कम किसी की सम्पत्िा तो थे और सम्पत्िा होने के नाते इनकी देखभाल की जाती थी कि कहीं दुर्बल और बेकाम न हो जाएं। पर आज तो ये किसी की सम्पत्िा नहीं हैं। मामूली बातों के लिए ये जीते जी जला दिए जाते हैं, गोली से उड़ा दिए जाते हैं और इनकी हत्याओं पर कोई कानून ही लागू नहीं होता। क्यों? इसलिए कि ये ‘निगर’ हैं, मानो ये मनुष्य तो क्या पशु भी नहीं हैं।’’ (वि.सा., पंचम खंड, पृष्ठ 108)


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सौगुनी अधिक बुरी दशा को पहुंच गए। इस युद्व से पूर्व ये बेचारे निग्रो कम से कम किसी की सम्पत्िा तो थे और सम्पत्िा होने के नाते इनकी देखभाल की जाती थी कि कहीं दुर्बल और बेकाम न हो जाएं। पर आज तो ये किसी की सम्पत्िा नहीं हैं। मामूली बातों के लिए ये जीते जी जला दिए जाते हैं, गोली से उड़ा दिए जाते हैं और इनकी हत्याओं पर कोई कानून ही लागू नहीं होता। क्यों? इसलिए कि ये ‘निगर’ हैं, मानो ये मनुष्य तो क्या पशु भी नहीं हैं।’’ (वि.सा., पंचम खंड, पृष्ठ 108)


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