योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



‘‘यहां के अंग्रेज़ बड़े सहृद हैं। कुछ एंग्लोइंडियनों को छोड़कर वे काले आदमियों से बिल्कुल घृणा नहीं करते। न वे मुझे सड़कों पर ‘हूट’ ही करते हैं। कभी-कभी मैं सोचने लगता हूं कि कहीं मेरा चेहरा गोरा तो नहीं हो गया, किन्तु दर्पण सारे सत्य को प्रकट कर देता है।’’

‘‘आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि यहां बहुत से विचारशील स्त्री-पुरूष सोचते हैं कि सामाजिक समस्या का एक मात्र हल हिन्दुओं की जाति-प्रथा है। आप कल्पना कर सकते हैं कि अपने


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‘‘यहां के अंग्रेज़ बड़े सहृद हैं। कुछ एंग्लोइंडियनों को छोड़कर वे काले आदमियों से बिल्कुल घृणा नहीं करते। न वे मुझे सड़कों पर ‘हूट’ ही करते हैं। कभी-कभी मैं सोचने लगता हूं कि कहीं मेरा चेहरा गोरा तो नहीं हो गया, किन्तु दर्पण सारे सत्य को प्रकट कर देता है।’’

‘‘आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि यहां बहुत से विचारशील स्त्री-पुरूष सोचते हैं कि सामाजिक समस्या का एक मात्र हल हिन्दुओं की जाति-प्रथा है। आप कल्पना कर सकते हैं कि अपने


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