इस उच्चतम केन्द्र में लेगेट का ब्याह देखने के लिए विवेकानन्द लगभग दो हफ्ते रूके और उसके बाद इंग्लैंड चले गए।
वहां से कुमारी जोसफिन मैक्लिआड को उन्होंने लिखा, ‘‘मैं सकशल लंदन पहंुच गया।...भारत से लौटे बहुत से अवकाश प्राप्त जनरलों से मुलाकात हुई। वे मेरे प्रति बहुत ही शिष्ट और विनीत हैं। प्रत्येक काले आदमी को नीग्रो समझने का वह अद्भुत ज्ञान यहां नहीं है, और कोई भी सड़क पर टकटकी लगाकर मुझे नहीं देखता।’’ और फिर एक महीना बाद श्रीमती लेगेट को लिखते हैः
इस उच्चतम केन्द्र में लेगेट का ब्याह देखने के लिए विवेकानन्द लगभग दो हफ्ते रूके और उसके बाद इंग्लैंड चले गए।
वहां से कुमारी जोसफिन मैक्लिआड को उन्होंने लिखा, ‘‘मैं सकशल लंदन पहंुच गया।...भारत से लौटे बहुत से अवकाश प्राप्त जनरलों से मुलाकात हुई। वे मेरे प्रति बहुत ही शिष्ट और विनीत हैं। प्रत्येक काले आदमी को नीग्रो समझने का वह अद्भुत ज्ञान यहां नहीं है, और कोई भी सड़क पर टकटकी लगाकर मुझे नहीं देखता।’’ और फिर एक महीना बाद श्रीमती लेगेट को लिखते हैः