जाता था। पढ़ा बहुत कुछ था और अपनी इस स्मरणशक्ति के कारण वे चलते-फिरते विश्वकोश थे। धर्म-महासभा में उन्हें जो असाधारण सफलता प्राप्त हुई, उसका एक मुख्य कारण यह भी था।
पाश्चात्य देश की 1900 में उन्होंने दूसरी यात्रा की। तब उन्होंने बंगला पत्रिका ‘उद्बोधन’ के लि यूरोप यात्रा के संस्करण लिखे थे। जर्मनी की उभरती हुई जवान शक्ति का मूल्यांकन उन्होंने इन शब्दों में लिखा था:
‘‘जर्मनी की जनसंख्या-वृद्वि प्रबल है, जर्मन बडे़ ही
जाता था। पढ़ा बहुत कुछ था और अपनी इस स्मरणशक्ति के कारण वे चलते-फिरते विश्वकोश थे। धर्म-महासभा में उन्हें जो असाधारण सफलता प्राप्त हुई, उसका एक मुख्य कारण यह भी था।
पाश्चात्य देश की 1900 में उन्होंने दूसरी यात्रा की। तब उन्होंने बंगला पत्रिका ‘उद्बोधन’ के लि यूरोप यात्रा के संस्करण लिखे थे। जर्मनी की उभरती हुई जवान शक्ति का मूल्यांकन उन्होंने इन शब्दों में लिखा था:
‘‘जर्मनी की जनसंख्या-वृद्वि प्रबल है, जर्मन बडे़ ही