बाद शुरू हुई। इस बीच उन्होंने पाश्चात्य जीवन और उनकी अर्थ-लालसा को भली-भांति समझ लिया और उनका सुनहला स्वप्न अर्थात् भ्रम टूट गया। विदेश जाने का उनका वास्तविक उद्देश्य उन ईसाई मिशनरियों से लोहा लेना था, जिनके द्वारा विदेशी साम्राज्यवाद ने अपनी राजनीतिक विजय को दृढ़ बनाने के लिए हम पर सांस्कृतिक आक्रमण शुरू किया था। उन्नीसवीं सदी में पुनर्जागरण की जो लहर उठी, जिस पर हम आगे चलकर विचार करेंगे, इसी आक्रमण की प्रतिक्रिया थी।
बाद शुरू हुई। इस बीच उन्होंने पाश्चात्य जीवन और उनकी अर्थ-लालसा को भली-भांति समझ लिया और उनका सुनहला स्वप्न अर्थात् भ्रम टूट गया। विदेश जाने का उनका वास्तविक उद्देश्य उन ईसाई मिशनरियों से लोहा लेना था, जिनके द्वारा विदेशी साम्राज्यवाद ने अपनी राजनीतिक विजय को दृढ़ बनाने के लिए हम पर सांस्कृतिक आक्रमण शुरू किया था। उन्नीसवीं सदी में पुनर्जागरण की जो लहर उठी, जिस पर हम आगे चलकर विचार करेंगे, इसी आक्रमण की प्रतिक्रिया थी।