योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



चार साल के प्रवास काल में उन्होंने जो देखा-सीखा, धर्म-महासभा में उन्हें जो असाधारण सफलता प्राप्त हुई फिर उनके जो विचार बने, यह भाषण उस सबका एक स्पष्ट चित्र प्रस्तुत करता है। जाते समय उन्होंने जो यह घोषणा की थी कि वे पाश्चात्य देशों से भारत की भूखी जनता के लिए आर्थिक सहायता मांगने जा रहे हैं, वह एक हीन उद्देश्य, अस्पष्ट चेतना का विकृत बिम्ब, एक भ्रम मात्र था। अच्छा हुआ कि धर्म महासभा उनके अमेरिका पहंुचने के एक महीना


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चार साल के प्रवास काल में उन्होंने जो देखा-सीखा, धर्म-महासभा में उन्हें जो असाधारण सफलता प्राप्त हुई फिर उनके जो विचार बने, यह भाषण उस सबका एक स्पष्ट चित्र प्रस्तुत करता है। जाते समय उन्होंने जो यह घोषणा की थी कि वे पाश्चात्य देशों से भारत की भूखी जनता के लिए आर्थिक सहायता मांगने जा रहे हैं, वह एक हीन उद्देश्य, अस्पष्ट चेतना का विकृत बिम्ब, एक भ्रम मात्र था। अच्छा हुआ कि धर्म महासभा उनके अमेरिका पहंुचने के एक महीना


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