‘‘साम्प्रदायिकता, हठधर्मिता और उनकी बीभत्स वंशधर धर्मांधता इस सुन्दर पृथ्वी पर बहुत समय तक राज्य कर चुकी है। वे पृथ्वी को हिंसा से भरती रही है, उसको बारम्बार मानवता के रक्त से नहलाती रही है, सभ्यताओं को ध्वस्त करती और पूरे-पूरे देशों को निराशा के गर्त में डालती रही है। यदि ये बीभत्स दानवी नहीं होते, तो मानव समाज आज की अवस्था से कहीं उन्नत हो गया होता। पर अब उनका समय आ गया है और मैं आंतरिक रूप से आशा करता हूं कि आज सुबह इसी सभा के सम्मान में जो घंटा-ध्वनि हुई है,
‘‘साम्प्रदायिकता, हठधर्मिता और उनकी बीभत्स वंशधर धर्मांधता इस सुन्दर पृथ्वी पर बहुत समय तक राज्य कर चुकी है। वे पृथ्वी को हिंसा से भरती रही है, उसको बारम्बार मानवता के रक्त से नहलाती रही है, सभ्यताओं को ध्वस्त करती और पूरे-पूरे देशों को निराशा के गर्त में डालती रही है। यदि ये बीभत्स दानवी नहीं होते, तो मानव समाज आज की अवस्था से कहीं उन्नत हो गया होता। पर अब उनका समय आ गया है और मैं आंतरिक रूप से आशा करता हूं कि आज सुबह इसी सभा के सम्मान में जो घंटा-ध्वनि हुई है,