वह समस्त धर्मांन्धता का, तलवार या लेखनी के द्वारा होने वाले सभी उत्पीड़नों का, तथा एक ही लक्ष्य की ओर अग्रसर होने वाले मानवों की पारस्परिक कटुताओं का मृत्यु-निनाद सिद्व हो।’’
एक दूर देश में विवेकानन्द ने साहस और प्रतिभा का परिचय दिया। सुन्दर शरीर, भव्य आकृति और आंखों में असाधारण चक्र-इस भारतीय संन्यासी की शान उस समय देखते ही बनती होगी।
19 सितम्बर को स्वामी जी का हिन्दू धर्म का भाषण उस सभा के सब भाषणों में बेजोड़ था।
वह समस्त धर्मांन्धता का, तलवार या लेखनी के द्वारा होने वाले सभी उत्पीड़नों का, तथा एक ही लक्ष्य की ओर अग्रसर होने वाले मानवों की पारस्परिक कटुताओं का मृत्यु-निनाद सिद्व हो।’’
एक दूर देश में विवेकानन्द ने साहस और प्रतिभा का परिचय दिया। सुन्दर शरीर, भव्य आकृति और आंखों में असाधारण चक्र-इस भारतीय संन्यासी की शान उस समय देखते ही बनती होगी।
19 सितम्बर को स्वामी जी का हिन्दू धर्म का भाषण उस सभा के सब भाषणों में बेजोड़ था।