वक्ष पर कसे तनकर बेल रहे थे। दूसरे वक्ताओं की तरह ‘ईसाई धर्म और पाश्चात्य सभ्यता ने हमें बहुत कुछ सिखाया है’ इत्यादि भद्र चापलूसी की बातें कहने वे वहां नहीं गए थे और न वे मर्तिपूजा के लिए किसी तरह लज्जित थे बल्कि इसी बात को लेकर प्रहार पर प्रहार करते चले गए। मूर्तिपूजक की नैतिकता, आध्यात्मिक और प्रेम को लासानी बताते हुए उन्होंने कहा:
‘‘अंधविश्वास मनुष्य का महान शत्रु है, पर धर्मान्धता उससे भी बढकर है। ईसाई गिरजाघर क्यों
वक्ष पर कसे तनकर बेल रहे थे। दूसरे वक्ताओं की तरह ‘ईसाई धर्म और पाश्चात्य सभ्यता ने हमें बहुत कुछ सिखाया है’ इत्यादि भद्र चापलूसी की बातें कहने वे वहां नहीं गए थे और न वे मर्तिपूजा के लिए किसी तरह लज्जित थे बल्कि इसी बात को लेकर प्रहार पर प्रहार करते चले गए। मूर्तिपूजक की नैतिकता, आध्यात्मिक और प्रेम को लासानी बताते हुए उन्होंने कहा:
‘‘अंधविश्वास मनुष्य का महान शत्रु है, पर धर्मान्धता उससे भी बढकर है। ईसाई गिरजाघर क्यों