इसलिए तो हिन्दू आराधना के समय ब्रह्म प्रतीक का उसके मन को अपने ध्यान के विषय परमेश्वर में एकाग्रता से स्थिर रहने में सहायता देता है। वह भी यह बात उतनी ही अच्छी तरह से जानते हैं, जितना आप जानते हैं कि वह मूर्ति न तो ईश्वर ही है और न सर्वव्यापी ही। और सच पूछिए तो दूनिया के लोग ‘सर्वव्यापकत्व का क्या अर्थ समझते है? वह तो कवेल एक शब्द या प्रतीक मात्र है। क्या परमेश्वर का भी कोई क्षेत्रफल है? यदि नहीं तो जिस समय हम सर्वव्यापी शब्द का उच्चारण करते हैं,
इसलिए तो हिन्दू आराधना के समय ब्रह्म प्रतीक का उसके मन को अपने ध्यान के विषय परमेश्वर में एकाग्रता से स्थिर रहने में सहायता देता है। वह भी यह बात उतनी ही अच्छी तरह से जानते हैं, जितना आप जानते हैं कि वह मूर्ति न तो ईश्वर ही है और न सर्वव्यापी ही। और सच पूछिए तो दूनिया के लोग ‘सर्वव्यापकत्व का क्या अर्थ समझते है? वह तो कवेल एक शब्द या प्रतीक मात्र है। क्या परमेश्वर का भी कोई क्षेत्रफल है? यदि नहीं तो जिस समय हम सर्वव्यापी शब्द का उच्चारण करते हैं,