उस समय विस्तृत आकाश या देश ही की कल्पना करने के सिवा हम और क्या करते हैं?’’
यह भाषण क्या दिया, स्वामी जी ने भिड़ों के छत्ो को छेड़ दिया। धर्म-सभा के कुछ प्रतिनिधि पंजे झाड़कर उनके पीछे पड़ गए। उनका कहना था, ‘‘विवेकानन्द ने जिस प्रकार आत्मा की महिमा घोषित की है उसके संबंध में अधिकांश हिन्दुओं को जानकारी नहीं है। सूक्ष्म तर्क और युक्ति के द्वारा मूर्ति पूजा की दार्शनिक व्याख्या कर वे पाश्चात्य जगत की आंखों में धूल झोंक रहे हैं, क्योंकि जड़ के उपासक पौत्तलिक
उस समय विस्तृत आकाश या देश ही की कल्पना करने के सिवा हम और क्या करते हैं?’’
यह भाषण क्या दिया, स्वामी जी ने भिड़ों के छत्ो को छेड़ दिया। धर्म-सभा के कुछ प्रतिनिधि पंजे झाड़कर उनके पीछे पड़ गए। उनका कहना था, ‘‘विवेकानन्द ने जिस प्रकार आत्मा की महिमा घोषित की है उसके संबंध में अधिकांश हिन्दुओं को जानकारी नहीं है। सूक्ष्म तर्क और युक्ति के द्वारा मूर्ति पूजा की दार्शनिक व्याख्या कर वे पाश्चात्य जगत की आंखों में धूल झोंक रहे हैं, क्योंकि जड़ के उपासक पौत्तलिक