अलबत्ता विवेकानन्द से कहा गया कि वे प्रतिवादियों द्वारा उठाई गई आपत्िायों का खंडन करें। इसके लिए तो वे पहले ही से तैयार थे। अतएव 22 सितम्बर को उन्होंने भारत के वर्तमान धर्म-समूह की आलोचना-सभा में विरोधियों की विद्वेषपूर्ण युक्तियों का दृढ़ता से उत्तर दिया। इसके बाद 25 तारीख को ‘हिन्दू धर्म का सार’ नामक भाषण देते समय बीच में रूककर उन्होंने श्रोताओं से पूछा, ‘‘इस सभा में जो हिन्दू धर्म व शास्त्र के साथ प्रत्यक्ष रूप से परिचित हैं,
अलबत्ता विवेकानन्द से कहा गया कि वे प्रतिवादियों द्वारा उठाई गई आपत्िायों का खंडन करें। इसके लिए तो वे पहले ही से तैयार थे। अतएव 22 सितम्बर को उन्होंने भारत के वर्तमान धर्म-समूह की आलोचना-सभा में विरोधियों की विद्वेषपूर्ण युक्तियों का दृढ़ता से उत्तर दिया। इसके बाद 25 तारीख को ‘हिन्दू धर्म का सार’ नामक भाषण देते समय बीच में रूककर उन्होंने श्रोताओं से पूछा, ‘‘इस सभा में जो हिन्दू धर्म व शास्त्र के साथ प्रत्यक्ष रूप से परिचित हैं,