योद्धा सन्यासी विवेकानंद - Yoddha Sanyasi Vivekanand



‘‘अब धर्म-महासभा उस स्थान पर पहुंची, जहां तीव्र कटुता उत्पन्न हो गई। निस्संदेह शिष्टाचार का पतला परदा बना रहा, किन्तु उसके पीछे दुर्भावना विद्यमान थी। रवेरेन्ड जोसेफ कुक ने हिन्दुओं की तीव्र आलोचना की और बदले में उनकी भी आलोचना हुई। उन्होंने कहा, ‘‘बिना रचे गए विश्व की बात करना प्रायः अक्षम्य प्रलाप है, और एशिया वालों ने प्रत्युत्तर दिया कि ऐसा विश्व जिसका प्रारम्भ है, एक स्वयं सिद्व बेतुकापन है। विशप जे. पी. न्यूमैन


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‘‘अब धर्म-महासभा उस स्थान पर पहुंची, जहां तीव्र कटुता उत्पन्न हो गई। निस्संदेह शिष्टाचार का पतला परदा बना रहा, किन्तु उसके पीछे दुर्भावना विद्यमान थी। रवेरेन्ड जोसेफ कुक ने हिन्दुओं की तीव्र आलोचना की और बदले में उनकी भी आलोचना हुई। उन्होंने कहा, ‘‘बिना रचे गए विश्व की बात करना प्रायः अक्षम्य प्रलाप है, और एशिया वालों ने प्रत्युत्तर दिया कि ऐसा विश्व जिसका प्रारम्भ है, एक स्वयं सिद्व बेतुकापन है। विशप जे. पी. न्यूमैन


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